E = mc² कैलकुलेटर क्या है?
यह कैलकुलेटर अल्बर्ट आइंस्टीन के सबसे मशहूर समीकरण \(E = mc^{2}\) पर आधारित है, जो द्रव्यमान और ऊर्जा के बीच की समतुल्यता को दर्शाता है। यह बताता है कि किसी दिए गए द्रव्यमान को पूरी तरह ऊर्जा में बदलने पर उसमें कितनी ऊर्जा समाई होती है। थोड़े से द्रव्यमान में भी बेहिसाब ऊर्जा छिपी रहती है, क्योंकि प्रकाश की गति का वर्ग बहुत बड़ी संख्या होती है।
इसका उपयोग कैसे करें
किलोग्राम में द्रव्यमान दर्ज करें और कैलकुलेटर तुरंत उसकी विश्राम ऊर्जा जूल में बता देगा। यह एक सार्वभौमिक भौतिकी उपकरण है — यह हर जगह एक समान काम करता है और इसमें किसी देश-विशेष की कोई धारणा नहीं है।
सूत्र की व्याख्या
समीकरण है $$E = m \times c^{2}$$ जहाँ E ऊर्जा है जूल (J) में, m द्रव्यमान है किलोग्राम (kg) में, और c निर्वात में प्रकाश की गति है, जो ठीक-ठीक \(299{,}792{,}458\ \text{मी/से}\) है। c का वर्ग करने पर लगभग \(8.99 \times 10^{16}\) मिलता है, और इसी वजह से द्रव्यमान विशाल मात्रा में ऊर्जा में बदल जाता है।
हल किया हुआ उदाहरण
1 किग्रा द्रव्यमान के लिए: $$E = 1 \times (299{,}792{,}458)^{2} = 1 \times 8.98755179 \times 10^{16} = \text{लगभग } 8.99 \times 10^{16}\ \text{जूल}$$ यह एक बड़े परमाणु हथियार से निकलने वाली ऊर्जा के बराबर है — और यह सब महज एक किलोग्राम में समाया हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या इसका मतलब है कि किसी भी द्रव्यमान को ऊर्जा में बदला जा सकता है? सिद्धांत रूप में हाँ, पर व्यवहार में केवल नाभिकीय अभिक्रियाएँ और पदार्थ-प्रतिपदार्थ विनाश (annihilation) ही इस ऊर्जा का कोई सार्थक हिस्सा मुक्त कर पाते हैं।
यह किन इकाइयों का उपयोग करता है? द्रव्यमान किलोग्राम में और ऊर्जा जूल में (SI इकाइयाँ)।
c का वर्ग क्यों किया जाता है? प्रकाश की गति का वर्ग करने से ही ऊर्जा का मान इतना विशाल बनता है; यह विशेष आपेक्षिकता (special relativity) के निगमन से आता है।