यह कैलकुलेटर क्या करता है
COVID-19 मास्क कचरा कैलकुलेटर यह अनुमान लगाता है कि एक तय समय में लोगों का कोई समूह कितना डिस्पोजेबल फेस-मास्क कचरा पैदा करता है। महामारी के दौरान एक बार इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल और रेस्पिरेटर मास्क प्लास्टिक प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत बन गए। रोज़ का इस्तेमाल, अवधि, आबादी और एक मास्क के वज़न को गुणा करके यह टूल आपको किलोग्राम और मीट्रिक टन में साफ़ आँकड़ा देता है। यह एक सार्वभौमिक कैलकुलेटर है — गणना पूरी तरह सीधी अंकगणित पर आधारित है, इसलिए यह दुनिया के किसी भी हिस्से में लागू होता है।
इसका इस्तेमाल कैसे करें
चार मान भरें: हर व्यक्ति रोज़ कितने मास्क इस्तेमाल करता है, कितने दिन, कितने लोग, और एक मास्क का वज़न ग्राम में। आम तौर पर एक डिस्पोजेबल सर्जिकल मास्क का वज़न लगभग 3 ग्राम होता है; जबकि N95/FFP2 रेस्पिरेटर का वज़न करीब 8–10 ग्राम होता है। कैलकुलेट दबाएँ और कुल कचरे का वज़न तथा इस्तेमाल किए गए मास्क की कुल संख्या देखें।
फ़ॉर्मूला समझें
मुख्य समीकरण है $$\text{कचरा (किग्रा)} = \frac{\text{मास्क/दिन} \times \text{दिन} \times \text{लोग} \times \text{मास्क का वज़न (ग्राम)}}{1000}$$। पहले हम कुल मास्क गिनते हैं (मास्क/दिन × दिन × लोग), फिर हर मास्क के ग्राम वज़न को 1,000 से भाग देकर किलोग्राम में बदलते हैं। किलोग्राम के कुल को फिर से 1,000 से भाग देने पर बड़ी आबादी के लिए मीट्रिक टन का आँकड़ा मिल जाता है।
हल किया हुआ उदाहरण
मान लीजिए 1,000 लोग 365 दिनों तक रोज़ 1 मास्क इस्तेमाल करते हैं, और हर मास्क का वज़न 3 ग्राम है। कुल मास्क $$= 1 \times 365 \times 1{,}000 = 365{,}000 \text{ मास्क}$$ कचरा $$= 365{,}000 \times (3 \div 1000) = 1{,}095 \text{ किग्रा}$$ यानी एक साल में लगभग 1.095 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा — और वह भी सिर्फ़ एक छोटे-से समुदाय से।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एक डिस्पोजेबल मास्क का वज़न कितना होता है? सर्जिकल मास्क आम तौर पर 2.5–4 ग्राम के होते हैं; N95/FFP2 रेस्पिरेटर करीब 8–10 ग्राम के होते हैं। अपने हालात के मुताबिक सही आँकड़ा इस्तेमाल करें।
क्या इसमें पैकेजिंग शामिल है? नहीं — इसमें सिर्फ़ मास्क का वज़न गिना जाता है। ज़रूरत हो तो पैकेजिंग का वज़न अलग से जोड़ें।
क्या ये मास्क रीसायकल हो सकते हैं? ज़्यादातर डिस्पोजेबल मास्क में पॉलीप्रोपिलीन की परतें, नाक के पास धातु का तार और इलास्टिक मिले होते हैं, जिससे इन्हें रीसायकल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए इनका बड़ा हिस्सा लैंडफिल या जलाने में ही चला जाता है।