QR फैक्टराइज़ेशन क्या है?
QR फैक्टराइज़ेशन (जिसे QR डीकम्पोज़िशन भी कहते हैं) रेखीय बीजगणित (linear algebra) की एक बुनियादी तकनीक है, जिसमें किसी मैट्रिक्स A को दो मैट्रिक्स के गुणनफल के रूप में लिखा जाता है: \(\mathbf{A} = \mathbf{Q}\,\mathbf{R}\)। यहाँ Q एक ऑर्थोगोनल मैट्रिक्स है (इसके कॉलम परस्पर लंबवत यूनिट वेक्टर होते हैं, इसलिए \(\mathbf{Q}^{\mathsf{T}}\mathbf{Q} = \mathbf{I}\)) और R एक अपर-ट्राइएंगुलर (ऊपरी त्रिकोणीय) मैट्रिक्स होता है। यह डीकम्पोज़िशन पूरी दुनिया में संख्यात्मक गणना में इस्तेमाल होता है और किसी भी वास्तविक मैट्रिक्स पर लागू होता है — देश या परंपरा से इसका कोई संबंध नहीं।
QR फैक्टराइज़ेशन का व्यापक उपयोग रेखीय समीकरण हल करने, लीस्ट-स्क्वेयर्स रिग्रेशन फिट निकालने और QR एल्गोरिदम के ज़रिए आइगनवैल्यूज़ (eigenvalues) ढूँढने में होता है। मैट्रिक्स का सीधा इन्वर्स निकालने की तुलना में यह संख्यात्मक रूप से ज़्यादा स्थिर (numerically stable) है, इसीलिए यह कई वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग सॉफ़्टवेयर में मौजूद रहता है।
$$\mathbf{A} = \mathbf{Q}\,\mathbf{R}, \quad \mathbf{Q}^{\mathsf{T}}\mathbf{Q} = \mathbf{I},\ \ \mathbf{R}\ \text{upper triangular}$$
इस कैलकुलेटर का उपयोग कैसे करें
अपना मैट्रिक्स डालना बेहद आसान है:
- एक रो के मानों को कॉमा ( , ) से अलग करें।
- हर रो को पाइप ( | ) चिह्न से अलग करें।
- उदाहरण के लिए, रो (1, 2) और (3, 4) वाला मैट्रिक्स इस तरह लिखा जाएगा:
1,2|3,4।
सबमिट करते ही कैलकुलेटर ऑर्थोगोनल मैट्रिक्स Q और अपर-ट्राइएंगुलर मैट्रिक्स R दिखा देता है, ताकि आप दोनों का गुणा करके पुष्टि कर सकें कि परिणाम आपके मूल मैट्रिक्स के बराबर है।
फ़ॉर्मूला समझें
सबसे प्रचलित तरीका ग्राम-श्मिट (Gram–Schmidt) प्रक्रिया है। A के कॉलम \(a_1, a_2, \ldots\) लेकर यह एल्गोरिदम वेक्टरों का एक ऑर्थोनॉर्मल समूह बनाता है:
- पहले कॉलम को लेकर उसे नॉर्मलाइज़ करें, जिससे \(q_1\) मिलता है।
- हर अगले कॉलम में से, पहले बने q वेक्टरों पर उसके प्रोजेक्शन घटाएँ, फिर बची हुई मात्रा को नॉर्मलाइज़ करें।
- R के मान डॉट प्रोडक्ट \(r_{ij} = q_i \cdot a_j\) होते हैं, और R अपर-ट्राइएंगुलर इसलिए बनता है क्योंकि पहले वाले q वेक्टर बाद के कॉलम पर निर्भर नहीं करते।
हल किया हुआ उदाहरण
मान लीजिए A = 1,1|0,1|1,0 (एक 3×2 मैट्रिक्स)। पहले कॉलम को नॉर्मलाइज़ करने पर \(q_1 = (0.707,\ 0,\ 0.707)\) मिलता है। दूसरे कॉलम में से इसका प्रोजेक्शन घटाकर और नॉर्मलाइज़ करके \(q_2\) प्राप्त होता है। नतीजा एक ऑर्थोगोनल Q है, जिसके कॉलम यूनिट लंबाई के और परस्पर लंबवत हैं, जबकि R में प्रोजेक्शन गुणांक रहते हैं। \(\mathbf{Q} \times \mathbf{R}\) का गुणा करने पर मूल A वापस मिल जाता है, जिससे डीकम्पोज़िशन की पुष्टि हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैट्रिक्स का वर्गाकार (square) होना ज़रूरी है? नहीं। QR फैक्टराइज़ेशन किसी भी m×n मैट्रिक्स पर काम करता है, जहाँ \(m \geq n\) हो। यही वजह है कि अज्ञातों से ज़्यादा समीकरणों वाली लीस्ट-स्क्वेयर्स समस्याओं में यह इतना उपयोगी है।
क्या QR डीकम्पोज़िशन अद्वितीय (unique) होता है? यह R के विकर्ण (diagonal) मानों के चिह्नों के अंतर तक अद्वितीय होता है। आमतौर पर R के विकर्ण को धनात्मक रखा जाता है, ताकि एक ही निश्चित उत्तर मिले।
मैट्रिक्स का इन्वर्स निकालने के बजाय QR क्यों इस्तेमाल करें? QR संख्यात्मक रूप से ज़्यादा स्थिर है और मैट्रिक्स इन्वर्स सीधे निकालने में आने वाली राउंडिंग त्रुटियों से बचाता है, जिससे आपके परिणाम ज़्यादा भरोसेमंद रहते हैं।