कार यात्रा कार्बन फुटप्रिंट कैलकुलेटर क्या है?
यह टूल बताता है कि किसी तय दूरी तक कार चलाने पर कितनी कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) निकलती है। यह तीन बातों पर आधारित है — आप कितनी दूर जाते हैं, आपकी कार कितने माइलेज में ईंधन इस्तेमाल करती है, और उस ईंधन के जलने पर हर लीटर से कितनी CO₂ बनती है। अगर आप कार शेयर करते हैं, तो यह फुटप्रिंट सभी यात्रियों में बंट जाता है, जिससे हर व्यक्ति का असली प्रति-व्यक्ति असर साफ दिखता है।
इसका इस्तेमाल कैसे करें
यात्रा की दूरी किलोमीटर में और अपनी कार का माइलेज किलोमीटर प्रति लीटर में दर्ज करें। ईंधन का प्रकार चुनें — पेट्रोल, डीज़ल या LPG — इसी से उत्सर्जन फैक्टर तय होता है। आखिर में बताएं कि कितने लोग सफर कर रहे हैं, ताकि कैलकुलेटर कुल उत्सर्जन को हर यात्री में बांट सके। नतीजे में आपको कुल किलोग्राम CO₂, जली हुई ईंधन की मात्रा, प्रति यात्री हिस्सा और प्रति किलोमीटर ग्राम CO₂ दिखाई देगी।
फॉर्मूला समझें
इस्तेमाल हुआ ईंधन = दूरी ÷ माइलेज। उस ईंधन के जलने पर CO₂ एक तय दर से निकलती है: पेट्रोल के लिए लगभग 2.31 किग्रा प्रति लीटर, डीज़ल के लिए 2.68 किग्रा और LPG के लिए 1.51 किग्रा। यानी कुल उत्सर्जन = दूरी ÷ माइलेज × उत्सर्जन फैक्टर। ये फैक्टर हर ईंधन में मौजूद कार्बन की मात्रा से निकाले जाते हैं और पर्यावरण एजेंसियों द्वारा व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं।
$$\text{CO}_2\text{ per person} = \frac{\dfrac{\text{Distance (km)}}{\text{Economy (km/L)}} \times \text{Emission Factor (kg/L)}}{\text{Passengers}}$$
हल किया हुआ उदाहरण
मान लीजिए आप पेट्रोल कार से 100 किमी चलते हैं जिसका माइलेज 12 किमी प्रति लीटर है: इस्तेमाल हुआ ईंधन = \(100 \div 12 = 8.33\) लीटर। \(\text{CO}_2 = 8.33 \times 2.31 = 19.25\) किग्रा। अगर दो यात्री हैं, तो हर व्यक्ति के हिस्से लगभग 9.63 किग्रा CO₂ आती है, और इस यात्रा का औसत करीब 192.5 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर बनता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इसमें कार बनाने या बिजली का असर शामिल है? नहीं — यह केवल यात्रा के दौरान ईंधन जलने से निकली टेलपाइप CO₂ को गिनता है, कार के निर्माण या ईंधन की प्रोसेसिंग को नहीं।
इलेक्ट्रिक कारों का क्या? EV में टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता, इसलिए यह टूल पेट्रोल/डीज़ल वाली कारों के लिए है। EV का फुटप्रिंट इस बात पर निर्भर करता है कि बिजली कैसे बनी है।
यात्रियों में क्यों बांटें? कारपूलिंग से वही उत्सर्जन ज़्यादा लोगों में बंट जाता है, जिससे हर व्यक्ति का प्रति यात्रा फुटप्रिंट काफ़ी कम हो जाता है।