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सूत्र (फॉर्मूला)

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परिणाम

बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर
5%
घर्षणात्मक + संरचनात्मक बेरोज़गारी
घर्षणात्मक दर 2.5%
संरचनात्मक दर 2.5%
प्राकृतिक दर 5%

बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर क्या है?

बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर वह स्तर है जो तब मौजूद रहती है जब कोई अर्थव्यवस्था अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रही हो — यानी जब चक्रीय (मंदी के कारण होने वाली) बेरोज़गारी बिल्कुल न हो। यह उस अनिवार्य बेरोज़गारी को दर्शाती है जो एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था में भी बनी रहती है। यह दो हिस्सों से बनी होती है: घर्षणात्मक बेरोज़गारी (वे लोग जो एक नौकरी छोड़कर दूसरी की तलाश में हैं या पहली बार श्रमबल में प्रवेश कर रहे हैं) और संरचनात्मक बेरोज़गारी (जब कामगारों के कौशल या जगह और उपलब्ध नौकरियों के बीच मेल नहीं बैठता)।

इस कैलकुलेटर का उपयोग कैसे करें

घर्षणात्मक बेरोज़गारी दर और संरचनात्मक बेरोज़गारी दर को प्रतिशत में दर्ज करें। कैलकुलेटर इन दोनों को जोड़कर बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर बता देता है। ये दोनों घटक बेरोज़गारी के "गैर-चक्रीय" हिस्से हैं, इसलिए इनका योग वह दर है जो पूर्ण रोज़गार की स्थिति में भी बनी रहती है।

सूत्र की व्याख्या

इसका मूल संबंध इस प्रकार है:

$$\text{प्राकृतिक दर} = \text{घर्षणात्मक दर} + \text{संरचनात्मक दर}$$

चूँकि वास्तविक बेरोज़गारी, प्राकृतिक और चक्रीय बेरोज़गारी के योग के बराबर होती है, इसलिए इसे इस रूप में भी लिखा जा सकता है: \(\text{प्राकृतिक दर} = \text{वास्तविक दर} - \text{चक्रीय दर}\)। दोनों ही रूप एक ही "पूर्ण-रोज़गार" दर को बताते हैं।

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घर्षणजनित और संरचनात्मक बेरोज़गारी मिलकर प्राकृतिक दर बनाती हैं
प्राकृतिक दर घर्षणजनित और संरचनात्मक बेरोज़गारी के योग के बराबर होती है।

हल किया हुआ उदाहरण

मान लीजिए किसी अर्थव्यवस्था में घर्षणात्मक बेरोज़गारी दर 3% और संरचनात्मक बेरोज़गारी दर 2% है। तब बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर होगी \(3\% + 2\% = 5\%\)। अगर वास्तविक बेरोज़गारी 7% होती, तो चक्रीय हिस्सा \(7\% - 5\% = 2\%\) होता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या प्राकृतिक दर और पूर्ण रोज़गार एक ही चीज़ हैं? हाँ — अर्थशास्त्र में "पूर्ण रोज़गार" का मतलब है कि बेरोज़गारी प्राकृतिक दर के बराबर है, न कि शून्य बेरोज़गारी।

क्या प्राकृतिक दर समय के साथ बदलती है? हाँ। जनसांख्यिकी, तकनीक, श्रम कानून और शिक्षा घर्षणात्मक और संरचनात्मक बेरोज़गारी को बदलते रहते हैं, इसलिए प्राकृतिक दर स्थिर नहीं रहती।

चक्रीय बेरोज़गारी क्या है? यह आर्थिक मंदी के कारण होने वाली बेरोज़गारी है। यह प्राकृतिक दर का हिस्सा नहीं है और पूर्ण रोज़गार की स्थिति में लगभग शून्य हो जाती है।

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