CD कैलकुलेटर क्या है?
सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) एक टाइम डिपॉजिट है जो अमेरिका और कई देशों में बैंक और क्रेडिट यूनियन देते हैं। इसमें आप एक तय अवधि के लिए अपना पैसा लॉक कर देते हैं और बदले में एक तय ब्याज दर मिलती है। (भारत में यह फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD के बराबर है, हालांकि नियम और शर्तें कुछ अलग हो सकती हैं।) यह कैलकुलेटर आपकी जमा राशि, ब्याज दर, अवधि और कंपाउंडिंग की आवृत्ति के आधार पर बताता है कि मैच्योरिटी पर आपके CD की कीमत कितनी होगी और आपको कुल कितना ब्याज मिलेगा।
इसका इस्तेमाल कैसे करें
अपनी शुरुआती जमा राशि, सालाना ब्याज दर (या APY) प्रतिशत में, अवधि वर्षों में डालें और चुनें कि बैंक ब्याज को कितनी बार कंपाउंड करता है (आमतौर पर मासिक)। कैलकुलेटर तुरंत आपकी मैच्योरिटी वैल्यू, मूल राशि और पूरी अवधि में कमाया गया कुल ब्याज दिखा देगा।
फॉर्मूला समझें
यह बढ़ोतरी कंपाउंड इंटरेस्ट फॉर्मूले के हिसाब से होती है
$$A = P\left(1 + \frac{r}{n}\right)^{n \cdot t}$$जहाँ \(A\) मैच्योरिटी वैल्यू है, \(P\) मूल राशि है, \(r\) दशमलव में लिखी गई सालाना दर है, \(n\) एक साल में कंपाउंडिंग की संख्या है, और \(t\) वर्षों की संख्या है। कुल ब्याज बस \(A - P\) के बराबर होता है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए आप $10,000 को 5 साल के CD में 5% सालाना दर पर जमा करते हैं और ब्याज मासिक रूप से कंपाउंड होता है (\(n = 12\))। तब
$$A = 10{,}000 \times \left(1 + \frac{0.05}{12}\right)^{12 \times 5} = 10{,}000 \times (1.0041667)^{60} \approx \$12{,}833.59$$होगा। यानी आपका कुल कमाया गया ब्याज लगभग $2,833.59 रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह दर APY के बराबर है? APY में कंपाउंडिंग का असर पहले से शामिल होता है, इसलिए अगर आप APY डाल रहे हैं तो सबसे सटीक नतीजे के लिए "सालाना" चुनें। अगर आप नॉमिनल दर डाल रहे हैं, तो बैंक की असली कंपाउंडिंग आवृत्ति चुनें।
क्या मैं समय से पहले पैसा निकाल सकता हूँ? ज़्यादातर CD पर समय से पहले निकासी पर पेनल्टी लगती है, जिसे यह कैलकुलेटर नहीं गिनता। यह मानकर चलता है कि आप मैच्योरिटी तक पैसा रखेंगे।
क्या CD की कमाई पर टैक्स लगता है? ज़्यादातर देशों में ब्याज से होने वाली आय उसी साल टैक्स के दायरे में आती है जिस साल वह जमा होती है। यह टूल किसी भी टैक्स से पहले का ग्रॉस ब्याज दिखाता है। (भारत में FD के ब्याज पर TDS और आपकी आय स्लैब के अनुसार टैक्स लागू होता है।)