प्रेरकीय प्रतिघात क्या होता है?
प्रेरकीय प्रतिघात (\(X_L\)) वह विरोध है जो कोई प्रेरक (इंडक्टर) प्रत्यावर्ती धारा (AC) के प्रवाह के सामने पेश करता है। प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) से अलग, प्रतिघात आवृत्ति पर निर्भर करता है — सिग्नल की आवृत्ति जितनी अधिक होगी, इंडक्टर बदलती धारा का उतना ही ज़्यादा "विरोध" करेगा। इसे भी प्रतिरोध की तरह ओम (Ω) में ही मापा जाता है, लेकिन यह ऊर्जा के क्षय से नहीं, बल्कि धारा में बदलाव का विरोध करने की इंडक्टर की प्रवृत्ति से उत्पन्न होता है।
इस कैलकुलेटर का उपयोग कैसे करें
AC आवृत्ति हर्ट्ज़ (Hz) में और प्रेरकत्व हेनरी (H) में दर्ज करें। कैलकुलेटर आपको प्रेरकीय प्रतिघात ओम में बताएगा। उदाहरण के लिए, 100 mH की कॉइल के लिए 0.1 H लिखें और 47 µH की कॉइल के लिए 0.000047 H। आम बिजली आपूर्ति की आवृत्ति 50 Hz या 60 Hz होती है (भारत में 50 Hz प्रचलित है), जबकि RF सर्किट में यह हज़ारों या लाखों हर्ट्ज़ तक हो सकती है।
सूत्र की व्याख्या
प्रतिघात इस सूत्र से निकलता है — $$X_L = 2\pi f L$$ जहाँ f आवृत्ति (हर्ट्ज़ में) और L प्रेरकत्व (हेनरी में) है। यहाँ \(2\pi f\) पद सामान्य आवृत्ति को कोणीय आवृत्ति (\(\omega\), रेडियन प्रति सेकंड में) में बदल देता है, इसलिए यह सूत्र \(X_L = \omega L\) के बराबर भी है। चूँकि प्रतिघात सीधे आवृत्ति और प्रेरकत्व दोनों के अनुपात में बढ़ता है, इनमें से किसी एक का मान दोगुना करने पर प्रतिघात भी दोगुना हो जाता है।
हल किया गया उदाहरण
मान लीजिए एक 0.1 H का इंडक्टर 60 Hz पर काम कर रहा है। तब $$X_L = 2 \times \pi \times 60 \times 0.1 = 37.699 \ \Omega$$ होगा। वहीं 50 Hz पर वही कॉइल $$X_L = 2 \times \pi \times 50 \times 0.1 = 31.416 \ \Omega$$ देगी — इससे साफ़ पता चलता है कि आवृत्ति बढ़ने पर प्रतिघात कैसे बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या प्रेरकीय प्रतिघात बिजली की खपत करता है? नहीं। एक आदर्श इंडक्टर हर चक्र में ऊर्जा को संचित करके वापस लौटा देता है, इसलिए यह कोई वास्तविक शक्ति (रियल पावर) खर्च नहीं करता — इसमें केवल प्रतिघाती शक्ति (रिएक्टिव पावर) का प्रवाह होता है।
DC (0 Hz) पर क्या होता है? जब \(f = 0\) हो, तो \(X_L = 0\) हो जाता है, यानी एक आदर्श इंडक्टर दिष्ट धारा (DC) के लिए शॉर्ट सर्किट जैसा व्यवहार करता है।
यह धारितीय प्रतिघात से कैसे अलग है? प्रेरकीय प्रतिघात आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ता है, जबकि धारितीय प्रतिघात (\(X_C = \frac{1}{2\pi f C}\)) आवृत्ति बढ़ने पर घटता है।