पोस्ट-मनी वैल्यूएशन क्या है?
पोस्ट-मनी वैल्यूएशन एक वित्तीय आँकड़ा है जो किसी कंपनी को बाहरी निवेश मिलने के बाद की कुल कीमत दर्शाता है। इस वैल्यूएशन में निवेशकों द्वारा डाली गई नई पूँजी भी शामिल होती है। किसी फंडिंग राउंड के बाद इक्विटी का बँटवारा कैसा रहेगा, यह समझने के लिए निवेशकों और फाउंडर दोनों के लिए यह एक बेहद अहम आँकड़ा है।
पोस्ट-मनी वैल्यूएशन कैलकुलेटर कब इस्तेमाल करें
यह कैलकुलेटर कई स्थितियों में काम आता है:
- जब आप निवेश पूँजी जुटा रहे हों और संभावित निवेशकों के साथ शर्तों पर मोलभाव कर रहे हों
- जब किसी नए फंडिंग राउंड के बाद मौजूदा शेयरधारकों की इक्विटी कितनी घटेगी (डाइल्यूशन) यह तय करना हो
- जब आप भविष्य के फंडिंग राउंड की योजना बना रहे हों और समझना चाहते हों कि वैल्यूएशन बदलने से मालिकाना हिस्सेदारी पर क्या असर पड़ता है
पोस्ट-मनी वैल्यूएशन की गणना कैसे करें
पोस्ट-मनी वैल्यूएशन निकालने का फ़ॉर्मूला है:
पोस्ट-मनी वैल्यूएशन = निवेश राशि / (निवेशक की इक्विटी प्रतिशत / 100)
इसी से आप ये भी निकाल सकते हैं:
प्री-मनी वैल्यूएशन = पोस्ट-मनी वैल्यूएशन − निवेश राशि
फाउंडर इक्विटी प्रतिशत = 100 − निवेशक की इक्विटी प्रतिशत
उदाहरण
उदाहरण 1: सीड फंडिंग राउंड
एक स्टार्टअप को 20% इक्विटी के बदले $500,000 की सीड फंडिंग मिलती है। पोस्ट-मनी वैल्यूएशन कितना होगा?
| इनपुट | मान |
|---|---|
| निवेश राशि | $500,000 |
| निवेशक की इक्विटी प्रतिशत | 20% |
| परिणाम | मान |
| पोस्ट-मनी वैल्यूएशन | $2,500,000 |
| प्री-मनी वैल्यूएशन | $2,000,000 |
| फाउंडर इक्विटी प्रतिशत | 80% |
उदाहरण 2: सीरीज़ A फंडिंग
एक बढ़ती हुई कंपनी 15% इक्विटी के बदले $2 मिलियन की सीरीज़ A फंडिंग हासिल करती है। पोस्ट-मनी वैल्यूएशन निकालिए।
| इनपुट | मान |
|---|---|
| निवेश राशि | $2,000,000 |
| निवेशक की इक्विटी प्रतिशत | 15% |
| परिणाम | मान |
| पोस्ट-मनी वैल्यूएशन | $13,333,333 |
| प्री-मनी वैल्यूएशन | $11,333,333 |
| फाउंडर इक्विटी प्रतिशत | 85% |
उदाहरण 3: लेट-स्टेज निवेश
एक स्थापित कंपनी 8% इक्विटी के बदले $10 मिलियन प्राप्त करती है। इसका वैल्यूएशन क्या होगा?
| इनपुट | मान |
|---|---|
| निवेश राशि | $10,000,000 |
| निवेशक की इक्विटी प्रतिशत | 8% |
| परिणाम | मान |
| पोस्ट-मनी वैल्यूएशन | $125,000,000 |
| प्री-मनी वैल्यूएशन | $115,000,000 |
| फाउंडर इक्विटी प्रतिशत | 92% |
ध्यान रखने योग्य अहम बातें
- पोस्ट-मनी वैल्यूएशन हमेशा प्री-मनी वैल्यूएशन से ठीक उतना ही ज़्यादा होता है, जितनी राशि निवेश की गई है
- निवेशकों को दी जाने वाली इक्विटी प्रतिशत सीधे तौर पर आपकी कंपनी के निहित (इम्प्लाइड) वैल्यूएशन को तय करती है
- तय राशि जुटाते समय जितना ऊँचा पोस्ट-मनी वैल्यूएशन होगा, मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी उतनी ही कम घटेगी (कम डाइल्यूशन)
- निवेशक अक्सर प्री-मनी वैल्यूएशन के आधार पर मोलभाव करते हैं, लेकिन पोस्ट-मनी ही कंपनी की अंतिम कीमत होती है