यह कैलकुलेटर क्या करता है
कार सेंटर ऑफ मास कैलकुलेटर आपकी गाड़ी के व्हीलबेस पर सेंटर ऑफ ग्रैविटी (CG) की लंबाई-दिशा (longitudinal) में सटीक स्थिति बताता है। हर एक्सल का वज़न तौलकर और व्हीलबेस नापकर आप ठीक-ठीक जान सकते हैं कि गाड़ी का द्रव्यमान फ्रंट एक्सल से कितनी दूरी पर केंद्रित है — यह आंकड़ा हैंडलिंग के संतुलन, ब्रेकिंग और वज़न-ट्रांसफर के विश्लेषण के लिए बेहद अहम है।
इसका इस्तेमाल कैसे करें
कार को कॉर्नर या एक्सल स्केल पर रखें और फ्रंट एक्सल पर पड़ने वाला कुल वज़न तथा रियर एक्सल पर पड़ने वाला कुल वज़न नोट करें। फिर व्हीलबेस नापें (आगे और पीछे के पहियों के केंद्र-से-केंद्र की दूरी)। तीनों मान दर्ज करें और कैलकुलेटर आपको हर एक्सल से CG की दूरी तथा आगे/पीछे का वज़न बँटवारा बता देगा।
फ़ॉर्मूला समझें
चूँकि फ्रंट एक्सल के बारे में मोमेंट संतुलित होने चाहिए, इसलिए सेंटर ऑफ मास भारी छोर की ओर ज़्यादा झुका होता है। फ्रंट एक्सल से दूरी रियर एक्सल पर पड़े वज़न के अनुपात को व्हीलबेस से गुणा करने पर मिलती है:
$$d_{\text{front}} = \frac{W_{\text{rear}}}{W_{\text{total}}} \times \text{व्हीलबेस}$$रियर एक्सल से दूरी बस व्हीलबेस में से यह मान घटाकर मिलती है, यानी \(\frac{W_{\text{front}}}{W_{\text{total}}} \times \text{व्हीलबेस}\)।
हल किया गया उदाहरण
मान लीजिए किसी कार के फ्रंट एक्सल पर 850 kg, रियर एक्सल पर 650 kg वज़न है और व्हीलबेस 2600 mm है। कुल वज़न हुआ 1500 kg। तब CG फ्रंट एक्सल से $$\left(\frac{650}{1500}\right) \times 2600 = 1126.67 \text{ mm}$$ पीछे और रियर एक्सल से $$\left(\frac{850}{1500}\right) \times 2600 = 1473.33 \text{ mm}$$ आगे बैठता है। वज़न वितरण लगभग 56.7% आगे / 43.3% पीछे होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह CG की ऊँचाई बताता है? नहीं — यह सिर्फ़ लंबाई-दिशा (आगे-से-पीछे) की स्थिति की गणना करता है। CG की ऊँचाई जानने के लिए गाड़ी को झुकाने या किसी एक एक्सल को उठाने (jacked-axle) वाला टेस्ट करना पड़ता है।
कौन-सी इकाइयाँ इस्तेमाल करूँ? एक्सल के वज़न के लिए कोई भी एक-समान इकाई (kg या lb) इस्तेमाल करें; दूरी का परिणाम उसी इकाई में मिलेगा जिसमें आपने व्हीलबेस दर्ज किया था (mm, cm या इंच)।
वज़न वितरण क्यों मायने रखता है? यह ट्रैक्शन, ब्रेकिंग संतुलन और कॉर्नरिंग को प्रभावित करता है। संतुलित हैंडलिंग के लिए लगभग 50/50 का बँटवारा अक्सर सबसे बेहतर माना जाता है।