पादुआ प्रिडिक्शन स्कोर क्या है?
पादुआ प्रिडिक्शन स्कोर एक प्रमाणित (validated) क्लिनिकल टूल है, जो अस्पताल में भर्ती मेडिकल (नॉन-सर्जिकल) मरीज़ों में शिरापरक थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म (VTE) — यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस और पल्मोनरी एम्बोलिज़्म — के जोखिम का अनुमान लगाने में मदद करता है। उच्च जोखिम वाले मरीज़ों की पहचान करके डॉक्टर तय कर सकते हैं कि दवा आधारित थ्रोम्बोप्रोफाइलैक्सिस की ज़रूरत है या नहीं।
इसका इस्तेमाल कैसे करें
अपने मरीज़ पर लागू होने वाले हर जोखिम कारक को टिक करें। कैलकुलेटर अपने आप भारित अंकों (weighted points) को जोड़ देता है। कुल 4 या उससे अधिक अंक होने पर मरीज़ को उच्च जोखिम में रखा जाता है। ऐसी स्थिति में, यदि रक्तस्राव (bleeding) से जुड़ा कोई विरोधाभास न हो, तो दिशानिर्देशों के अनुसार प्रोफाइलैक्सिस (जैसे लो-मॉलिक्यूलर-वेट हेपरिन) की सलाह आमतौर पर दी जाती है।
फ़ॉर्मूला समझें
हर कारक का एक तय वज़न होता है: सक्रिय कैंसर, पहले हो चुका VTE, कम गतिशीलता, और ज्ञात थ्रोम्बोफीलिया — इनमें से प्रत्येक 3 अंक जोड़ता है; हाल ही में हुआ आघात (trauma) या सर्जरी 2 अंक जोड़ती है; और आयु ≥70 वर्ष, हृदय/श्वसन विफलता, तीव्र हार्ट अटैक (MI) या इस्केमिक स्ट्रोक, तीव्र संक्रमण या रूमेटोलॉजिक विकार, मोटापा (BMI ≥30), तथा चल रहा हार्मोनल उपचार — इनमें से प्रत्येक 1 अंक जोड़ता है। कुल स्कोर 0 से 20 तक हो सकता है।
$$\text{Score} = \sum w_i x_i, \quad \text{High risk if Score} \ge 4$$
$$\text{Score} = 3c + 3v + 3m + 3t + 2s + a + h + i + f + o + r$$
उदाहरण से समझें
72 वर्ष का एक मरीज़ जिसे सक्रिय कैंसर है और जो बिस्तर पर ही रहता है, उसका स्कोर होगा $$3 \;(\text{कैंसर}) + 3 \;(\text{कम गतिशीलता}) + 1 \;(\text{आयु} \ge 70) = \mathbf{7} \text{ अंक}$$ चूँकि \(7 \ge 4\) है, इसलिए मरीज़ उच्च जोखिम में है और थ्रोम्बोप्रोफाइलैक्सिस पर विचार किया जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन-सा स्कोर उच्च जोखिम दर्शाता है? पादुआ स्कोर 4 या उससे अधिक होने पर VTE का उच्च जोखिम माना जाता है।
क्या यह सर्जिकल मरीज़ों पर लागू होता है? नहीं — पादुआ स्कोर अस्पताल में भर्ती मेडिकल मरीज़ों के लिए प्रमाणित है। सर्जिकल मरीज़ों के लिए कैप्रिनी (Caprini) स्कोर जैसे मॉडल का इस्तेमाल करना चाहिए।
क्या यह क्लिनिकल निर्णय का विकल्प है? नहीं। यह सिर्फ़ एक निर्णय-सहायक उपकरण है और इसे रक्तस्राव के जोखिम तथा समग्र क्लिनिकल स्थिति के आकलन के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।