डेट-टू-इनकम रेशियो क्या है?
डेट-टू-इनकम (DTI) अनुपात यह दिखाता है कि हर महीने आप कर्ज चुकाने में कितना पैसा लगाते हैं और टैक्स कटने से पहले आपकी कमाई कितनी है। बैंक और लेंडर इसी से तय करते हैं कि आप आराम से और कितना कर्ज ले सकते हैं। यह कैलकुलेटर खास तौर पर क्रेडिट कार्ड की किस्तों के साथ-साथ बाकी नियमित कर्जों को भी ध्यान में रखता है, ताकि आपको साफ़ दिखे कि आपकी आय का कितना हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है।
इसे कैसे इस्तेमाल करें
अपनी कुल मासिक क्रेडिट कार्ड किस्तें, बाकी मासिक कर्ज किस्तें (कार लोन, स्टूडेंट लोन, होम लोन, पर्सनल लोन) और अपनी ग्रॉस मासिक आय — यानी टैक्स और कटौती से पहले की कमाई — दर्ज करें। कैलकुलेटर आपको कुल DTI प्रतिशत, कुल मासिक कर्ज किस्त, और सिर्फ़ क्रेडिट कार्ड से जुड़ी आय का हिस्सा दिखा देगा।
फॉर्मूला समझें
गणित बेहद आसान है:
$$\text{DTI} = \frac{\text{कुल मासिक कर्ज किस्तें}}{\text{ग्रॉस मासिक आय}} \times 100\%$$प्रतिशत जितना कम होगा, आपके पास उतनी ही ज़्यादा वित्तीय राहत होगी। आम तौर पर 36% से कम DTI को अच्छा माना जाता है, 36–43% को संभाला जा सकता है पर लेंडर इस पर पैनी नज़र रखते हैं, और 43% से ज़्यादा होने पर नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए आप क्रेडिट कार्ड पर हर महीने $300 और कार लोन पर $500 चुकाते हैं, और आपकी ग्रॉस मासिक आय $4,000 है। कुल कर्ज हुआ $800।
$$\text{DTI} = \frac{800}{4000} \times 100 = 20\%$$सिर्फ़ क्रेडिट कार्ड का हिस्सा होगा
$$\frac{300}{4000} \times 100 = 7.5\%$$20% का DTI आराम से अच्छी श्रेणी में आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रॉस आय लें या नेट आय? ग्रॉस (टैक्स से पहले की) आय इस्तेमाल करें — DTI के लिए लेंडर यही मानक अपनाते हैं।
क्या इसमें किराया शामिल होता है? अगर किराया या होम लोन एक नियमित खर्च है, तो पूरी तस्वीर के लिए उसे बाकी कर्ज किस्तों में जोड़ें — हालांकि सिर्फ़ क्रेडिट कार्ड पर केंद्रित आकलन में किराया छोड़ा भी जा सकता है।
लेंडर किस DTI को बेहतर मानते हैं? ज़्यादातर लेंडर 36% या उससे कम कुल DTI को पसंद करते हैं, और योग्य ग्राहकों के लिए कुछ इसे 43% तक भी मंज़ूर कर लेते हैं।
ध्यान दें: यह कैलकुलेटर अमेरिकी डॉलर ($) में मूल्य दिखाता है और इसमें बताए गए DTI मानक (36%/43%) मुख्यतः अमेरिका जैसे बाज़ारों में लेंडर अपनाते हैं। भारत में बैंक भी DTI/FOIR जैसे अनुपात देखते हैं, पर सटीक सीमाएँ और नियम हर बैंक में अलग हो सकते हैं।