72 का नियम क्या है?
72 का नियम एक आसान मानसिक गणित का तरीका है, जिससे आप झटपट अंदाजा लगा सकते हैं कि किसी निश्चित सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न पर आपका निवेश दोगुना होने में कितने साल लगेंगे। चक्रवृद्धि ब्याज के पूरे जटिल समीकरण हल करने के बजाय, आप बस 72 को अपनी अनुमानित सालाना प्रतिशत रिटर्न दर से भाग दे देते हैं। यह एक सार्वभौमिक वित्तीय फॉर्मूला है — यह हर देश और हर मुद्रा में एक जैसा काम करता है।
इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
अपनी अनुमानित सालाना रिटर्न दर प्रतिशत में भरें (उदाहरण के लिए, 8% के लिए 8 लिखें)। कैलकुलेटर 72 को उस संख्या से भाग देकर बता देगा कि आपकी बचत को दोगुना होने में लगभग कितने साल लगेंगे। यह रिटायरमेंट प्लानिंग, अलग-अलग निवेशों की तुलना करने, या चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) की लंबी अवधि की ताकत समझने के लिए बेहद काम का है।
फॉर्मूला समझें
फॉर्मूला है $$\text{साल} = \frac{72}{r}$$ जहां \(r\) सालाना रिटर्न है, जिसे पूर्ण संख्या वाले प्रतिशत में लिखा जाता है। 72 इसलिए चुना गया है क्योंकि यह गणितीय रूप से सटीक मान (करीब 69.3, जो 2 के प्राकृतिक लघुगणक से निकलता है) के बहुत करीब है, और साथ ही 2, 3, 4, 6, 8, 9 और 12 से आसानी से विभाजित हो जाता है — जिससे हिसाब लगाना सरल हो जाता है। यह अनुमान लगभग 6% से 10% के बीच की रिटर्न दरों पर सबसे ज्यादा सटीक रहता है।
हल किया हुआ उदाहरण
मान लीजिए आपके रिटायरमेंट पोर्टफोलियो पर औसतन 8% सालाना रिटर्न मिलता है। 72 को 8 से भाग देने पर 9 आता है — यानी आपका पैसा करीब हर 9 साल में दोगुना हो जाएगा। $$\frac{72}{8} = 9$$ अगर आप आज $50,000 निवेश करते हैं, तो योगदान और टैक्स को छोड़कर, 9 साल में लगभग $100,000, 18 साल में $200,000 और 27 साल में $400,000 की उम्मीद कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 72 का नियम सटीक होता है? यह एक अनुमान है। 8% के आसपास की दरों पर यह बहुत करीब रहता है; पर बहुत ज्यादा या बहुत कम दरों पर यह सटीक चक्रवृद्धि नतीजे से थोड़ा हटने लगता है।
क्या मैं इसे महंगाई (इन्फ्लेशन) के लिए इस्तेमाल कर सकता हूं? हां — 72 को महंगाई दर से भाग दें, जिससे पता चलेगा कि कितने सालों में दाम दोगुने हो जाएंगे और आपके पैसे की खरीद क्षमता आधी रह जाएगी।
70 या 69 का नियम क्यों नहीं? 70 और 69.3 सटीक गणित के ज्यादा करीब हैं, लेकिन 72 के विभाजक ज्यादा साफ-सुथरे हैं, जिससे झटपट मानसिक अनुमान लगाना आसान हो जाता है।