रीफाइनेंस ब्रेक-ईवन कैलकुलेटर क्या है?
जब आप अपना मॉर्टगेज (गृह ऋण) रीफाइनेंस कराते हैं, तो शुरू में आपको क्लोजिंग कॉस्ट चुकानी पड़ती है, लेकिन बदले में आमतौर पर आपकी मासिक किस्त कम हो जाती है। ब्रेक-ईवन पॉइंट वह पड़ाव है जहाँ हर महीने हुई बचत मिलकर ठीक उतनी हो जाती है जितनी आपकी क्लोजिंग कॉस्ट थी। इसके बाद बचाया हुआ हर रुपया (या डॉलर) सीधे आपकी जेब में जाता है। यह कैलकुलेटर बताता है कि उस पड़ाव तक पहुँचने में कितने महीने लगेंगे, ताकि आप यह तय कर सकें कि अपने घर में जितने समय रुकने की योजना है, उसके लिहाज़ से रीफाइनेंसिंग फायदे का सौदा है या नहीं। ध्यान दें — यह उपकरण अमेरिकी मॉर्टगेज प्रणाली (डॉलर और क्लोजिंग कॉस्ट जैसे शुल्क) पर आधारित है; भारत समेत दूसरे देशों में होम लोन की प्रोसेसिंग फीस और नियम अलग हो सकते हैं, पर मूल गणना वहाँ भी उतनी ही काम की है।
इसका उपयोग कैसे करें
बस तीन आँकड़े भरें: आपकी मौजूदा मासिक किस्त, रीफाइनेंसिंग के बाद की संभावित नई मासिक किस्त, और नए लोन की कुल क्लोजिंग कॉस्ट (लेंडर की फीस, अप्रेज़ल, टाइटल, पॉइंट्स आदि)। कैलकुलेटर क्लोजिंग कॉस्ट को आपकी मासिक बचत से भाग देकर ब्रेक-ईवन पॉइंट महीनों और सालों में बता देता है।
फॉर्मूला आसान शब्दों में
गणित बहुत सीधा है:
$$\text{ब्रेक-ईवन महीने} = \frac{\text{क्लोजिंग कॉस्ट}}{\text{पुरानी किस्त} - \text{नई किस्त}}$$
यहाँ हर (denominator) आपकी मासिक बचत है। अगर नई किस्त पुरानी किस्त से कम नहीं है, तो कोई बचत नहीं होती और सिर्फ़ किस्त के आधार पर रीफाइनेंस कभी ब्रेक-ईवन तक नहीं पहुँचेगा।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए आपकी मौजूदा किस्त $1,600 है, नई किस्त $1,400 है और क्लोजिंग कॉस्ट $4,800 है। तो आपकी मासिक बचत हुई \(\$1{,}600 - \$1{,}400 = \$200\)। ब्रेक-ईवन =
$$\$4{,}800 \div \$200 = 24 \text{ महीने}$$
यानी 2 साल। अगर आप घर में दो साल से ज़्यादा रुकने की सोच रहे हैं, तो रीफाइनेंसिंग आपके लिए फायदेमंद रहने की संभावना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर ब्रेक-ईवन का समय मेरे घर में रुकने की अवधि से ज़्यादा हो तो क्या रीफाइनेंस करूँ? आमतौर पर नहीं — आप लागत वसूल होने से पहले ही घर बेच देंगे या शिफ्ट हो जाएंगे, जिससे इस सौदे में नुकसान होगा।
क्या यह लोन की अवधि दोबारा शुरू होने को भी जोड़ता है? नहीं। यह सिर्फ़ किस्त पर आधारित कैश-फ्लो ब्रेक-ईवन है। लंबी अवधि किस्त तो घटा देती है, पर कुल चुकाया जाने वाला ब्याज बढ़ा देती है, इसलिए पूरी अवधि के कुल ब्याज की भी तुलना ज़रूर करें।
क्या मैं क्लोजिंग कॉस्ट को लोन में ही जोड़ सकता हूँ? हाँ, लेकिन इससे आपकी बकाया राशि और किस्त दोनों बढ़ जाती हैं, जिससे ब्रेक-ईवन की अवधि लंबी हो जाती है। असली असर देखने के लिए इसके बाद बनने वाली नई किस्त ही भरें।