सापेक्ष आवृत्ति क्या होती है?
सापेक्ष आवृत्ति बताती है कि किसी आँकड़ा-समूह में कोई खास मान या श्रेणी (यानी "वर्ग") कुल प्रेक्षणों की तुलना में कितनी बार आती है। यह केवल गिनती न बताकर उस गिनती को पूरे समूह के एक भाग या अनुपात के रूप में दर्शाती है। इससे अलग-अलग आकार के वर्गों की तुलना करना या भिन्न-भिन्न कुल वाले आँकड़ा-समूहों की तुलना करना आसान हो जाता है।
इस कैलकुलेटर का उपयोग कैसे करें
बस दो संख्याएँ दर्ज करें: वर्ग आवृत्ति (वह वर्ग कितनी बार आता है) और कुल प्रेक्षण (पूरे आँकड़ा-समूह का आकार)। कैलकुलेटर पहली संख्या को दूसरी से भाग देकर दो परिणाम देता है — अनुपात (0 और 1 के बीच की एक संख्या) और उसके बराबर प्रतिशत।
सूत्र की व्याख्या
सापेक्ष आवृत्ति का सूत्र बहुत सरल है:
$$\text{सापेक्ष आवृत्ति} = \frac{\text{वर्ग आवृत्ति}}{\text{कुल प्रेक्षण}} \times 100\%$$
इसे प्रतिशत में बदलने के लिए परिणाम को 100 से गुणा करें। यदि आप किसी आँकड़ा-समूह के हर वर्ग की सापेक्ष आवृत्तियों को जोड़ें, तो उनका योग ठीक 1 (यानी 100%) आना चाहिए।
हल किया हुआ उदाहरण
मान लीजिए 60 विद्यार्थियों से सर्वे किया गया और उनमें से 15 ने अपने पसंदीदा भोजन के रूप में पिज़्ज़ा चुना। तो "पिज़्ज़ा" की सापेक्ष आवृत्ति होगी \(15 \div 60 = 0.25\), यानी 25%। इसका मतलब है कि एक-चौथाई विद्यार्थी पिज़्ज़ा पसंद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आवृत्ति और सापेक्ष आवृत्ति में क्या अंतर है? आवृत्ति केवल यह गिनती है कि कोई चीज़ कितनी बार होती है। सापेक्ष आवृत्ति उस गिनती को कुल से भाग देकर एक अनुपात देती है, जिसकी तुलना अलग-अलग आँकड़ा-समूहों के बीच की जा सकती है।
क्या सापेक्ष आवृत्ति 1 से अधिक हो सकती है? नहीं। चूँकि वर्ग आवृत्ति कुल प्रेक्षणों से अधिक नहीं हो सकती, इसलिए परिणाम हमेशा 0 और 1 (यानी 0% से 100%) के बीच ही रहता है।
प्रायिकता (Probability) में सापेक्ष आवृत्ति का उपयोग कैसे होता है? कई बार किए गए परीक्षणों में किसी घटना की सापेक्ष आवृत्ति उस घटना की प्रायिकता का एक प्रायोगिक अनुमान होती है — जितने अधिक परीक्षण, उतना ही यह वास्तविक प्रायिकता के करीब पहुँचती जाती है।