किराया-से-आय अनुपात क्या है?
किराया-से-आय अनुपात यह बताता है कि आपकी सकल (टैक्स से पहले की) मासिक आय का कितना हिस्सा किराए पर खर्च होता है। मकान मालिक, प्रॉपर्टी मैनेजर और किरायेदार किसी घर के किफ़ायती होने का अंदाज़ा लगाने के लिए सबसे ज़्यादा इसी पैमाने का इस्तेमाल करते हैं। यह प्रतिशत जितना कम होगा, बचत, खाने-पीने, आने-जाने और बाकी ज़रूरी खर्चों के लिए उतने ही ज़्यादा पैसे बचेंगे।
इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
अपना मासिक किराया और अपनी सकल मासिक आय (टैक्स और कटौतियों से पहले की आय) दर्ज करें। कैलकुलेटर किराए को आय से भाग देता है, 100 से गुणा करता है, और नतीजे के तौर पर प्रतिशत, किफ़ायतीपन का आकलन, और किराया चुकाने के बाद बची हुई आय दिखाता है।
फ़ॉर्मूला समझें
गणित बेहद आसान है:
$$\text{प्रतिशत} = \frac{\text{मासिक किराया}}{\text{मासिक आय}} \times 100$$नतीजा बताता है कि आपकी कमाई का कितना हिस्सा घर पर खर्च हो रहा है। ज़्यादातर मकान मालिक चाहते हैं कि यह अनुपात 30% या उससे कम रहे — इसी सीमा को अक्सर "30% का नियम" कहा जाता है।
उदाहरण के साथ हिसाब
मान लीजिए आपका किराया $1,500 है और आपकी सकल मासिक आय $5,000 है। अनुपात होगा
$$(1{,}500 \div 5{,}000) \times 100 = \mathbf{30\%}$$यह बिल्कुल किफ़ायतीपन की सीमा पर बैठता है, और बाकी सभी खर्चों के लिए $3,500 बच जाते हैं। (ध्यान दें: यह उदाहरण डॉलर में है; आप अपनी मुद्रा — जैसे रुपये — में अपने आँकड़े डाल सकते हैं, क्योंकि अनुपात मुद्रा पर निर्भर नहीं करता।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सकल आय इस्तेमाल करूँ या शुद्ध (नेट) आय? ज़्यादातर मकान मालिक सकल (टैक्स से पहले की) आय इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह कैलकुलेटर भी सकल आय मानकर चलता है। अगर आप ज़्यादा सावधानी भरा नज़रिया चाहते हैं, तो नेट आय दर्ज कर सकते हैं।
अच्छा किराया-से-आय अनुपात कितना होता है? 30% या उससे कम को आम तौर पर किफ़ायती माना जाता है। 30% से 40% के बीच का अनुपात तंग बजट दिखाता है, और 40% से ऊपर होने पर आप पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ माना जाता है।
क्या इसमें बिजली-पानी जैसे खर्च शामिल हैं? नहीं — इसमें सिर्फ़ बेसिक किराया गिना जाता है। अगर आप घर के कुल खर्च की पूरी तस्वीर चाहते हैं, तो बिजली-पानी जैसे औसत यूटिलिटी खर्च को अपने किराए की रकम में जोड़ लें।